कुछ गर्म आँसुओं से बर्फ़ की तासीर को बचा भी लो न। कुछ गर्म आँसुओं से बर्फ़ की तासीर को बचा भी लो न।
परहित की मनोकामना के संग राष्ट्र प्रेम विकसित करूँ मैं हूँ कवि। परहित की मनोकामना के संग राष्ट्र प्रेम विकसित करूँ मैं हूँ कवि।
टूटेगा ना धागा फ़िर से, कवि मन मेरा जागा फ़िर से। टूटेगा ना धागा फ़िर से, कवि मन मेरा जागा फ़िर से।
मैं एक कवि कवि ने खुद को ही प्रस्तुत किया है कविता के घर में पनाह माँगते हुए मैं एक कवि कवि ने खुद को ही प्रस्तुत किया है कविता के घर में पनाह माँगते हुए
शब्दों की भीड़ में मैं कवि को ढूँढ़ रही हूँ शब्दों की भीड़ में मैं कवि को ढूँढ़ रही हूँ
कविता का भाव संसार में अच्छाई बरसाता हैं, कविता का भाव संसार में अच्छाई बरसाता हैं,